Chapter-1 ➤ हम पंछी उन्मुक्त गगन के 1. लंबी उड़ान में क्या-क्या संभावनाएँ हो सकती थीं? क्षितिज की सीमा मिल जाती साँसों की डोरी तन जाती ये दोनों बातें हो सकती थीं कुछ नहीं होता 2. पक्षी क्यों व्यथित हैं? क्योंकि वे बंधन में हैं क्योंकि वे आसमान की ऊँचाइयाँ छूने में असमर्थ हैं क्योंकि वे अनार के दानों रूपी तारों को चुगने में असमर्थ हैं उपर्युक्त सभी 3. पिंजरे में पक्षी क्या-क्या भूल जाते हैं? अपनी गति अपनी उड़ान अपनी गति-उड़ान इनमें कोई नहीं 4. लाल किरणों-की सी चोंच से क्या तात्पर्य है? लाल चोंच सूर्य की किरणों जैसी लंबाई लिए चोंच जैसे सूर्य की किरण लालिमा लिए होते हैं, वैसे ही उनके चोंच भी लाल होते हैं इनमें कोई नहीं 5. ‘हम पंछी उन्मुक्त गगन के’ पाठ के रचयिता हैं भवानी प्रसाद मिश्र सर्वेश्वर दयाल सक्सेना शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ महादेवी वर्मा 6. उपरोक्त पद्यांश में पक्षियों की इच्छा है आकाश छूने की क्षितिज को पा जाने की निरंतर उड़ते रहने की आराम पाने की 7. पक्षी किस रूप में रहना चाहते हैं? व्याकुल उन्मुक्त पिंजरे में बंद पुलकित 8. ‘लाल किरण की चोंच’ में कौन-सा अलंकार है? अनुप्रास रूपक यमक उपमा 9. सोने का पिंजरा भी पक्षियों को क्यों नहीं पसंद आता है? वे तो खुले आसमान में उड़ना चाहते हैं क्योंकि उनकी आज़ादी छिन जाती है क्योंकि वे कैदी के रूप में नहीं रहते उपर्युक्त सभी 10. पक्षी किसकी सीमा पाना चाहते हैं? नीले आसमान की उड़ान की अनार की तारे की Loading … Question 1 of 10